लड़की- काश कि मैं उस दिन लेट हो जाती और तुम्हारे रास्ते ही ना आती।
लड़का- काश मैं उस दिन तुम्हारी तरफ देखा भी ना होता।
लड़की- काश तुम मुझसे मुस्कुरा के मिले ही ना होते।
लड़का- काश तुम मुस्कुरा कर मुझे देखी ही ना होती।
लड़की- काश कि मैं उस दिन तुमसे मदद ही ना ली होती।
लड़का- काश मैं उस दिन तुम्हारी मदद ही ना करता।
लड़की- काश कि तुम बस मदद करके यूं चले जाते।
लड़का- काश तुम मदद लेकर बस चली जाती।
लड़की- काश कि तुम मुझे उस दिन जाने देते।
लड़का- काश कि मैं उस दिन चला ही जाता।
लड़की- काश तुम्हें मेरी ना का मतलब ना ही समझ आता।
लड़का- काश तुम ना ही कह देती और मैं समझ जाता।
लड़की- काश मैं तुम्हारी तरह फिजिकली स्ट्रांग होती।
लड़का- काश मैं तुम्हारी तरह मेंटली स्ट्रांग होता।
लड़की- काश कि वो जगह भीड़ से भरी होती।
लड़का- काश उस जगह मेरी तुमसे दूरी होती।
लड़की- काश तुम एक बार तो सोच लेते कि मुझे कितना दर्द होगा।
लड़का- काश तुम एक बार इतना सोच लेती कि मुझे कितना फर्क पड़ेगा।
लड़की- काश कि तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हें अच्छे संस्कार दिए होते।
लड़का- काश तुम्हारे घरवालों ने तुम्हें अच्छे विचार दिए होते।
लड़की- काश तुम एक बार अपने मां और बहन के बारे में सोच लेते।
लड़का- काश तुम भी एक बार अपने बाप या भाई के बारे में सोच लेती।
लड़की- काश कि तुम समझ पाते कि बिना लड़की की मर्जी के उसके बदन को छूने से कैसा महसूस होता है।
लड़का- काश तुम समझ पाती कि बिना लड़के की इंटेंशन जाने उसको मोलेस्टर बोलने से क्या महसूस होता है।
लड़की- काश कि तुम ये दर्द समझ पाते कि जब इज्जत लुटती है तो जीने की आश खत्म हो जाती है।
लड़का- काश तुम ये दर्द समझ पाती कि इज्जत सबकी होती है और उसके जाते ही सब चला जाता है
लड़की- काश तुम ये समझ पाते कि इज्जत लुट जाने के बाद ना समाज साथ देता है, ना रिश्तेदार और ना ही कोई दोस्त।
लड़का- काश तुम भी समझ पाती कि मोलेस्टर का टैग लगने के बाद ना दोस्त साथ देते हैं, ना ही जॉब रहती है और ना ही कॅरियर की कोई होप।
लड़की- काश तुम समझ पाते कि तुमने मेरे शरीर को तार-तार करके यूं फेंक दिया तो कैसा महसूस हुआ, मेरी चीख तुम सुन पाते, मेरा दर्द तुम देख पाते, समाज की रुसवाई देख पाते, लोगों की घूरती निगाहें देख पाते, लोगों के ताने सुन पाते, अकेलापन झेल पाते, तुम्हारे दिये दर्द और घाव से मुझे रोते और लड़ते देख पाते, मेरे आंसू देख पाते, मेरे घरवालों को दर्द सहते देख पाते, मेरे घावों को समेटकर वापस उठकर मुझे लड़ते हुए देख पाते और उस निष्क्रिय, नपुंसक और निरीह कानून से मुझे हारते देख पाते....... काश!!!!!!
लड़का- तुम्हारा दर्द असहनीय है और इसको सहना सच में हिम्मत का काम है। लेकिन मैं अपने दर्द को भी कम नहीं समझता क्योंकि ये नाइंसाफी होगी। गलती मेरी भी थी, गलती तुम्हारी भी थी, बस तुम्हें दर्द ज्यादा हुआ, सहना ज्यादा पड़ा...
लेकिन देखो! आज हम दोनों एक साथ ये एक-दूसरे से कह पा रहें हैं और अब जाकर एक-दूसरे को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। अब इतनी देर हो चुकी है कि ना हम एक-दूसरे को माफी मांग सकते हैं और ना ही जो ग़लत हुआ उसे सही कर सकते हैं....
काश हम ये पहले कर पाते...
काश हम एक-दूसरे को पहले समझ और जान पाते...
लड़का और लड़की- हम तो एक-दूसरे को जीते जी समझ नहीं पाये और एक खुबसूरत ज़िंदगी को गंवा दिया...
काश आप ये बात जल्दी समझ जायें और अपनी खुबसूरत ज़िंदगी को किसी और की जिंदगी तबाह करने से रोक सकें....

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