Tuesday, October 1, 2019

फादर ऑफ़ नेशन : भारत के राष्ट्रपिता

भारत देश विविधताओं से परिपूर्ण एक ऐसा देश है जो सनातन से इस विश्व में उपस्थित है। ना ही इसका जन्म हुआ है और ना ही ये कभी खत्म होगा। इस देश का नाम राजा दुष्यंत और उनकी पत्नी शकुंतला देवी के पुत्र भरत के नाम पर "भारत" पड़ा। हिन्द महासागर और हिमालय पर्वत के मध्य के भूभाग होने की वजह से इसे "हिंदुस्तान" के नाम। से भी जाना जाता है। 

 आज का जो ज्वलंत मुद्दा है वो इस बात को लेकर है कि 5000 साल पुरानी इस सनातन सभ्यता के  देश का राष्ट्रपिता कौन है!? इस मुद्दे ने तूल इसलिए पकड़ा क्योंकि 24 सितम्बर 2019 को अमेरिका के टेक्सास शहर में हुए "हाऊडी मोदी" कार्यक्रम के पश्चात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस वार्ता के दौरान यह कहा की भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक पिता की तरह देश का खयाल रखते हैं, इस लिहाज से वो भारत के पिता हैं।


  स्कूल की किताबों में हमें बचपन से यही पढ़ाया गया कि महात्मा गांधी हमारे देश के राष्ट्रपिता हैं किन्तु 2012 में सूचना के अधिकार के तहत भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि संविधान और इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है कि महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता हैं। साथ ही साथ भारत के संविधान के अनुच्छेद 18 के अनुसार भारत के किसी भी व्यक्ति विशेष को भारत सरक़ार द्वारा कोई भी उपाधि नहीं दी जा सकती है। 


इस देश ने 1000-1200 साल की गुलामी देखी है। बहुत से आक्रांता, व्यापारी और शासक यहां किसी ना किसी परपेक्ष्य से आए, चले गए और कुछ यहां ही बसे रह गए। इस देश ने सबका स्वागत किया और सबकी यातनाओं को सहा भी। अंग्रेज़ भी भारत आए और उन्होंने भी यहां राज किया। उनके जाने के बाद लोगों ने ये भ्रम फैलाया कि भारत 15 अगस्त, 1947 को अंगेजों की दासता से आजाद हुआ है। अंग्रेजों के भारत छोड़ने के मूल कारणों को इतिहास से दबा दिया गया, मिटा दिया गया।  देश को आजाद कराने के लिए हजारों- लाखों वीरों, स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकरियों ने अपना बलिदान दिया और जीवन खपाया। सभी लोगों ने देश को मातृभूमि मानकर स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी।
कुछ पंक्तियां अपने बचपन की स्कूल की कविताओं की लिखना चाहूंगा-
राम-कृष्ण, गौतम, गांधी, इसी धरा पर आए थे
महावीर, आजाद, भगत सिंह, निज कर्तव्य निभाए थे,
हम उनकी संतानें ऐसी, अपना फर्ज निभाएंगे
मातृभूमि प्राणों से प्यारी, इस पर बलि बन जायेंगे।
ये वो देश है जिसे हम "मां" कहकर पुकारते हैं। इस धरती पर पैदा होने वाला हर एक व्यक्ति "भारत माता" का पुत्र है। फिर ऐसा क्या हुआ कि महात्मा गांधी को देश का "राष्ट्रपिता" बना दिया गया?
ऐसा कौन सा महान कार्य महात्मा गांधी ने कर दिया कि लोग उन्हें "राष्ट्रपिता" कहने लगे? कहां से उत्पत्ति हुई ऐसे शब्द की? आइए इतिहास के कुछ पन्ने पलट के देखें।
जुलाई 1915 में, गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार महात्मा गांधी के लिए "बापू" शब्द का इस्तेमाल किया था। "बापू" अर्थात "पिता" । और उसके बाद सभी उन्हें बापू कहकर पुकारने लगे। पूरे देश में जहां भी महात्मा गांधी जाते, लोग उन्हें आदरपूर्वक बापू कहकर पुकारते थे। इस प्रकार पूरे देश में ही उनका नाम "बापू" के नाम से प्रसिद्ध हो गया। अंग्रेजी में "बापू" को "फादर" कहते हैं।


आजादी की लड़ाई की इसी कड़ी में 21 अक्टूबर, 1943 को उत्तर - पूर्वी राज्य में एक वीर सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों को वहां की धरती से खदेड़ कर स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। उन्होंने "आजाद हिन्द सरकार" की स्थापना भी कर दी, अपना बैंक खोला, अपनी करंसी जारी की, नोट जारी किए, रेडियो खोला और पोस्ट ऑफिस तक खोला। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को उस "आजाद हिन्द सरकार" का प्रथम "प्रधानमंत्री" बनाया गया। इस सरकार और प्रधानमंत्री को उस समय के 11 देशों ने मान्यता दी जिसमें सोवियत संघ जैसा शक्तिशाली देश भी शामिल था। नेताजी ने 40 से 60000 की संख्या बल वाली "आजाद हिन्द फौज" खड़ी की जो अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए हरदम तैयार थी। 


द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त अगस्त 1942 में महात्मा गांधी ने "भारत छोड़ो" आंदोलन की शुरुआत की। इसे आग देने का काम लाल बहादुर शास्त्री जी ने "करो या मरो" आंदोलन का रूप देकर किया। किन्तु हमारे देश के ही कुछ मक्कार और गद्दार लोगों ने इसकी खबर ब्रिटिश सरकार तक पहुंचा दी और देखते ही देखते सारे आंदोलनकारियों को जेल में बंद कर दिया गया जिसमें महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री भी शामिल थे।



 द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म होते ही ब्रिटिश सरकार ने जून 1944 को महात्मा गांधी को जेल से रिहा कर दिया। इसके ठीक एक महीने बाद 6 जुलाई 1944 को नेताजी ने देश और महात्मा गांधी को रेडियो के जरिए संदेश दिया। नेताजी ने स्पष्ट कर दिया था कि अहिंसा के बल पर देश को आजादी नहीं मिल सकती । चूंकि "भारत छोड़ो" और "करो या मरो" आंदोलन बुरी तरह असफल हो चुका था, नेताजी ने अपने अंतिम पंक्तियों में महात्मा गांधी से आगे की लड़ाई के लिए उनके सहयोग और आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा कि
"Father of our Nation in this holy war for India's liberation, we ask for your blessings and good wishes."
अर्थात 
"इस लड़ाई में भारत की आजादी के लिए हमारे राष्ट्र के बापू (पिता), से हम आपके आशीर्वाद और बधाई की कामना करते हैं।"


चूंकि महात्मा गांधी को पूरा देश बापू के नाम से जानता था इसलिए नेताजी ने उनके लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया।
और इसे ही ढाल बनाकर तथाकथित राष्ट्रवादी और सत्ताधारी लोगों ने महात्मा गांधी को "राष्ट्रपिता" का दर्जा दे दिया और इस झूठ को पूरे देश में फैलाया गया। उनकी मृत्यु के पश्चात महात्मा गांधी को महान साबित करने के जुनून में उस समय के दोगले और मक्कार लोगों ने हमारी मातृभूमि भारत का राष्ट्रपिता बना दिया। लेकिन भारत सरकार के संविधान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि महात्मा गांधी इस देश के राष्ट्रपिता हैं। और वो कभी इस इस देश के राष्ट्रपिता हो नहीं सकते क्योंकि इस देश को हम मां कहकर पुकारते हैं और महात्मा गांधी इस देश के पुत्र हो सकते हैं, पिता नहीं। ना केवल महात्मा गांधी अपितु कोई भी इस देश का राष्ट्रपिता नहीं बन सकता ना हो सकता है। इस मातृभूमि में जन्म लेने वाला प्रत्येक मनुष्य इस माटी का लाल, बेटा, पुत्र हो सकता है किन्तु पिता नहीं। अतः देशवासियों से अनुरोध है कि वो किसी भी भ्रम और झूठ को ना माने और ना ही फैलाएं कि भारत का कोई राष्ट्रपिता है। 
जय हिन्द, वन्दे मातरम्


1 comment:

ऐकला चलो-१ (सीधे मौत)

 When I was completely blank Filled with tons of uncertainty tank I chose this city for my survival And it gave me perception of revival  आय...