Sunday, August 20, 2017

Zindagi Kuch Tham Si Gayi hai....

कल तक हवा की तरह बाह रहा था इस दुनिया में,
आज ज़िन्दगी कुछ थम सी गयी है।

 कल तक चेहरे में लग ही चमक थी ,
आज ये आँखें कुछ नम सी है।

तुम्हारी ख़ुशी के लिए तुम्हें भूल जाना चाहता हूँ,
पर ये रूह तुमसे जुदा  होने नहीं देती।
तुम्हें जताये बिना तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ,
पर ये जालिम दुनिया ये खता होने नहीं देती।

कल तक हम एक-दूसरे में डूबे हुए थे,
आज ये बातें कुछ वहम  सी हैं।

जब भी मैं तुमसे मिलता हूँ , जब भी आँखें टकराती है,
साँसें मेरी थम जाती है, मैं तुम में खो सा जाता हूँ।
कहना तो रहता है सब कुछ, करने को तुमसे बातें भी,
पर लफ्ज मेरे रुक जाते हैं, मैं दिल में रो-सा जाता हूँ।

दिल को घायल कर जाता है , तुम्हारे नजरअंदाज करने का तरीका ,
ये अंदाज-ए -नजरअंदाज, आज मेरे दिल पे जख्म सी है।

-विवेक 

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